Dr. Krishan Avtar

न्यूरोलॉजिस्ट · लेखक · साधक

डॉ. कृष्ण अवतार

चिकित्सा · चिन्तन · साधना

तीन दशकों से अधिक समय से मस्तिष्क एवं मन के रोगों की चिकित्सा, देहरादून में सिनर्जी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की स्थापना, और उसी जीवन के बीच से जन्मे कुछ गहरे प्रश्नों की साधना। यह वेबसाइट इन्हीं तीनों धाराओं का संगम है; चिकित्सा, चिन्तन, और साधना।

krishna sir
krishna sir

“यहाँ आपको किसी बात पर विश्वास करने के लिए नहीं कहा जाएगा।
आपको केवल अपने प्रश्नों के साथ थोड़ा और गहराई में जाने का निमन्त्रण है।”

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प्राचीन ज्ञान · आधुनिक विज्ञान · जीवित अनुभव

"पीड़ा एवं दुःख क्या हैं, एवं क्यों होते हैं?
यह "मैं" कौन है, जिसे दुःख होता है?
सच्चा सुख और परम आनन्द क्या है?
जीवन में भीतरी समता कैसे आए?
क्या मुक्ति इसी जीवन में सम्भव है?"

इन प्रश्नों को समझने की एक यात्रा।
आज का सूत्र

माता पिता सच्चे अर्थ में कभी खोते नहीं। वे हृदय के भीतर स्थान ले लेते हैं।

100+

मैं इस समय गहरे दुःख में हूँ

४

पुस्तकें

५०

जीवन सूत्र

५

स्वास्थ्य लेख

९

संकटों की निर्देशिका

इस चिन्तन की अपनी शैली

एक प्रश्न, तीन दृष्टियाँ

पीड़ा और दुःख में क्या अन्तर है।
ज्ञान क्या कहता है

पीड़ा शरीर को होती है, दुःख मन को। पीड़ा अनिवार्य है, दुःख वैकल्पिक है। और आनन्द हमारा मूल स्वभाव है।

विज्ञान की ओर से

एक न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में लेखक ने देखा कि एक सी पीड़ा में दो मनुष्यों का दुःख एक सा नहीं होता। यह अन्तर किसी औषधि से नहीं आता। यह अन्तर दृष्टि से आता है।

अनुभव की गवाही

ऐसे लोग देखे जिनकी सारी रिपोर्ट सामान्य थीं और जो भीतर से टूटे हुए थे। और ऐसे भी, जिनका रोग असाध्य था और जिनके भीतर एक विलक्षण शान्ति थी।

आज एक बार अपने अनुभव में देखिए; मेरी पीड़ा कहाँ समाप्त होती है, और मेरा दुःख कहाँ आरम्भ होता है।

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परिचय

मेरठ के एक संघर्षशील परन्तु संस्कारी घर से आरम्भ हुई यह यात्रा; पिता जी से सिद्धान्त मिले, माता जी से यह आग्रह कि भगवान का आश्रय कभी मत छोड़ना। सोलह वर्ष की आयु में पिता जी के वियोग ने चिकित्सा की दिशा दी। फिर एम.बी.बी.एस. में नौ स्वर्ण पदक, एम.डी., डी.एम. न्यूरोलॉजी, और २०१२ में एक स्वप्न का निर्माण; सिनर्जी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जो उत्तराखण्ड एवं निकटवर्ती क्षेत्रों का प्रथम एन.ए.बी.एच. तथा एन.ए.बी.एल. प्रमाणित संस्थान बना। और इस सबके भीतर, सन् १९८७ से, सन्तों की कृपा से चलती एक मौन साधना।

इस चिन्तन की अपनी शैली

पुस्तकें

यात्रा · दुःख से आनन्द की ओर। दुःख के प्रश्न पर, प्राचीन ज्ञान, आधुनिक विज्ञान एवं जिये हुए अनुभव के प्रकाश में, एक विनम्र और सम्पूर्ण विचार। पाँच खण्ड, बाईस अध्याय, ५०२ पृष्ठ।

शरणागति · जीवन के सबसे बड़े प्रश्न के उत्तर। समर्पण के विज्ञान पर एक वृहद् सन्दर्भ ग्रन्थ। निर्माणाधीन।

खोज · पदार्थ से परमात्मा तक। चेतना के रहस्य पर एक न्यूरोलॉजिस्ट की ईमानदार खोज; पदार्थ से चलकर उस सीमा तक, जहाँ भाषा धीमी पड़ने लगती है। सात सोपान, तेईस अध्याय।

भक्ति एवं ज्ञान · प्रेम से बोध तक, बोध से प्रेम तक। निर्माणाधीन।

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इस चिन्तन की अपनी शैली

पुस्तकें

यात्रा · दुःख से आनन्द की ओर। दुःख के प्रश्न पर, प्राचीन ज्ञान, आधुनिक विज्ञान एवं जिये हुए अनुभव के प्रकाश में, एक विनम्र और सम्पूर्ण विचार। पाँच खण्ड, बाईस अध्याय, ५०२ पृष्ठ।

शरणागति · जीवन के सबसे बड़े प्रश्न के उत्तर। समर्पण के विज्ञान पर एक वृहद् सन्दर्भ ग्रन्थ। निर्माणाधीन।

खोज · पदार्थ से परमात्मा तक। चेतना के रहस्य पर एक न्यूरोलॉजिस्ट की ईमानदार खोज; पदार्थ से चलकर उस सीमा तक, जहाँ भाषा धीमी पड़ने लगती है। सात सोपान, तेईस अध्याय।

भक्ति एवं ज्ञान · प्रेम से बोध तक, बोध से प्रेम तक। निर्माणाधीन।

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विचार एवं लेख

जीवन के लिए पचास चुने हुए सूत्र, बाईस आधार शब्द, दैनिक प्रार्थना के दो छोटे पाठ, नौ प्रकार के संकटों के लिए सहायता निर्देशिका, और पचीस लेख; मानवीय कहानियाँ, प्रश्न उत्तर, एवं विचार। आज का सूत्र प्रतिदिन इसी पृष्ठ पर बदलता है।

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स्वास्थ्य सलाह

एक न्यूरोलॉजिस्ट की कलम से, सरल हिन्दी में पाँच विस्तृत लेख; लकवा और वे कुछ घंटे जो सब कुछ तय करते हैं; दौरा कलंक नहीं, मस्तिष्क की एक बिजली है; हर सिरदर्द साधारण नहीं, हर सिरदर्द ट्यूमर भी नहीं; पिताजी भूलते नहीं हैं, बीमार हैं; और काँपते हाथ, थमते कदम। यह अनुभाग सामान्य जानकारी के लिए है, किसी रोगी विशेष का परामर्श नहीं।

साथ ही, मनुष्य होने का विज्ञान श्रृंखला के दस लेख; मस्तिष्क, मन, सुख, तनाव, स्मृति, स्वीकृति एवं चेतना पर।

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प्रेरणा स्रोत

परम श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज की वाणी; इक्कीस चुनी हुई शिक्षाएँ एवं तीन मूल साधना सूत्र। तथा गीता सेवा;
श्रीमद्भगवद्गीता एवं सन्त साहित्य के नित्य श्रवण पाठ की एक निःशुल्क भक्ति भेंट।

संपर्क

पत्र लिखिए; पाठक पत्र, जिज्ञासा, कार्यक्रम आमन्त्रण, अथवा प्रेस।

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ईमेल info@dr.krishanavtar.com

हम आपको कोई मत देने नहीं आए।
हम उन प्रश्नों के साथ बैठने आए हैं, जो हर मनुष्य के जीवन में उठते हैं।

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